लाक पोश्त वा हलज़ून (कछुआ और घोंघा) एक संवेदनशील ईरानी नाटक है जो तेहरान में रहने वाले दस वर्षीय शांत बच्चे पेद्रम की कहानी कहता है। जब उसकी माँ अफ़्सानेह दोबारा शादी करने की बात करती है, तो पेद्रम का नाजुक संसार हिल जाता है। वह अपने खिलौने कछुए और कागज़ के घोंघे जैसी छोटी चीज़ों में सुकून ढूंढता है।
एक रहस्यमय युवक के आने से फिल्म में अनकही भावनाएँ और गहरे सवाल उभरते हैं। निर्देशक रज़ा हमासी की काव्यात्मक शैली बदलाव, स्मृति और बचपन की कोमल दुनिया का सुंदर चित्रण करती है।
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