अंजा कासी दिवूने नीस्त (वहाँ कोई पागल नहीं) एक ईरानी सामाजिक कॉमेडी है जो एक शहर की बाहरी सीमा पर स्थित छोटे से मनोरोग अस्पताल में घटित होती है। समाज द्वारा "पागल" करार दिए गए कुछ मरीज़ दोस्ती, संघर्ष और आज़ादी की साझा चाहत में एक-दूसरे से जुड़ते हैं। एक नए मरीज़ के आने से वार्ड का नाज़ुक संतुलन बिगड़ जाता है, और एक खोई हुई दवा, एक अप्रत्याशित दोस्ती तथा एक वर्जित गाने के ज़रिये फ़िल्म सामान्यता और पागलपन के बीच की अदृश्य रेखा को उजागर करती है।
सूक्ष्म हास्य, काव्यात्मक दृश्यों और स्वाभाविक अभिनय के साथ यह फ़िल्म कलंक, सहानुभूति और हर इंसान की देखे-समझे जाने की चाहत पर एक मानवीय टिप्पणी है।
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